NCERT कक्षा 7 हिंदी (मल्हार) – पाठ 1: “माँ, कह एक कहानी” के प्रश्न हैं। नीचे सभी उत्तर NCERT की अवधारणा और पाठ के अनुसार दिए गए हैं।
✅ उत्तर:
✔ उसमें सही और गलत की समझ विकसित करने के लिए।
✅ उत्तर:
✔ करुणा और हिंसा के बीच के संघर्ष को दिखाने के लिए।
✅ उत्तर:
✔ न्याय सदैव करुणा के साथ होना चाहिए।
| पात्र | पहचान |
|---|---|
| माँ | महाप्रजापति गौतमी |
| पुत्र | राहुल |
| पिता | भगवान गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ) |
“कोई निरपराध को मारे…”
उत्तर:
इन पंक्तियों का अर्थ है कि किसी भी निर्दोष प्राणी पर अत्याचार नहीं होना चाहिए। जो उसकी रक्षा करे वही सच्चा न्याय करता है। न्याय में दया और करुणा का होना आवश्यक है।
“हुआ विवाद सदय-निर्दय में…”
उत्तर:
इन पंक्तियों में दयालु व्यक्ति और निर्दयी आखेटक के बीच हुए विवाद का वर्णन है। अंत में न्यायालय ने करुणा और न्याय के आधार पर निर्णय दिया।
उत्तर:
“रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय दया का दानी।”
यह सबसे महत्वपूर्ण पंक्ति है क्योंकि यह बताती है कि न्याय हमेशा दया और करुणा के साथ होना चाहिए।
आखेटक और बच्चे के पिता के बीच तर्क-वितर्क क्यों हुआ?
उत्तर:
आखेटक घायल हंस पर अपना अधिकार जता रहा था, जबकि सिद्धार्थ का कहना था कि घायल प्राणी की रक्षा करने वाले का अधिकार होना चाहिए।
माँ ने राहुल से “तू निर्णय कर इसका” क्यों कहा?
उत्तर:
ताकि राहुल स्वयं सोचकर सही और गलत का निर्णय करना सीखे तथा उसमें न्याय और करुणा की भावना विकसित हो।
यदि मैं वहाँ होता तो क्या करता?
उत्तर:
मैं घायल हंस की सहायता करता, उसका उपचार करता और उसे सुरक्षित स्थान पर पहुँचाता। मेरा मानना है कि घायल पक्षी को बचाने वाले के पास ही रहना चाहिए।
माँ और बेटे के बारे में क्या पता चलता है?
उत्तर:
माँ बुद्धिमान, स्नेहमयी और शिक्षाप्रद हैं।
राहुल जिज्ञासु, समझदार और विचारशील बालक है।
दोनों के बीच प्रेम और विश्वास का संबंध है।
यदि मैं कहानी सुनाता तो आगे क्या करता?
उत्तर:
मैं न्यायाधीश से निर्णय दिलवाता कि घायल हंस उसी व्यक्ति को दिया जाए जिसने उसकी जान बचाई। आखेटक को समझाया जाता कि किसी भी जीव को बिना कारण कष्ट नहीं देना चाहिए।
हंस और आखेटक के बीच बातचीत
उत्तर:
हंस: मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है?
आखेटक: मैं शिकार करने आया हूँ।
हंस: किसी निर्दोष जीव को मारना उचित नहीं।
आखेटक: अब मुझे अपनी गलती का एहसास हो गया।
आप कौन-सा पात्र बनना चाहेंगे?
उत्तर:
मैं पक्षी को बचाने वाला व्यक्ति (सिद्धार्थ) बनना चाहूँगा क्योंकि वह दयालु, न्यायप्रिय और करुणामय है।
“राहुल, तू निर्णय कर इसका।”
“माँ, कह एक कहानी।”
“सुन बेटा, मैं तुझे एक कहानी सुनाती हूँ।”
“माँ, कह एक कहानी।”
“फिर क्या हुआ माँ?”
“माँ, इसका निर्णय कौन करेगा?”
सभी जीवों पर दया करनी चाहिए।
न्याय में करुणा का होना आवश्यक है।
निर्दोष की रक्षा करना सबसे बड़ा धर्म है।
सही निर्णय सोच-समझकर लेना चाहिए।
प्रश्न: आप या आपके परिजन भ्रमण के लिए कहाँ-कहाँ जाते हैं और क्यों?
उत्तर:
मैं और मेरे परिवार के सदस्य प्रातःकाल पार्क, बगीचे तथा खुले मैदान में भ्रमण के लिए जाते हैं। वहाँ शुद्ध वायु मिलती है, स्वास्थ्य अच्छा रहता है और मन प्रसन्न रहता है।
प्रश्न: आप किस-किस से कहानी सुनते हैं या थे? आप किसको और कौन-सी कहानी सुनाते हैं?
उत्तर:
मैं अपनी माँ, दादी और अध्यापकों से कहानियाँ सुनता हूँ। मैं अपने छोटे भाई-बहनों और मित्रों को पंचतंत्र, अकबर-बीरबल तथा प्रेरणादायक कहानियाँ सुनाता हूँ।
प्रश्न: क्या कहानी सुनाने के बीच में प्रश्न पूछना सही है? क्यों?
उत्तर:
हाँ, कहानी के बीच में प्रश्न पूछना उचित है क्योंकि इससे श्रोता की रुचि बनी रहती है, उसकी समझ बढ़ती है और वह कहानी के बारे में सोचने लगता है।
प्रश्न: क्या आपका भी कोई कहानी बार-बार सुनने का मन करता है? कौन-सी और क्यों?
उत्तर:
हाँ, मुझे “सिंह और चूहे” की कहानी बार-बार सुनना अच्छा लगता है क्योंकि यह सिखाती है कि छोटा से छोटा व्यक्ति भी बड़े काम आ सकता है।
उत्तर:
मैं उसे शांतिपूर्वक नियम समझाऊँगा और दोबारा ऐसा न करने के लिए कहूँगा।
उत्तर:
मैं उसका साथ दूँगा, दूसरों को ऐसा करने से रोकूँगा और आवश्यकता होने पर अध्यापक को बताऊँगा।
उत्तर:
मैं उससे कारण पूछूँगा, उसे सहयोग दूँगा और समय पर कार्य पूरा करने के लिए प्रेरित करूँगा।
उत्तर:
मैं दोनों को शांत करूँगा और आपस में बातचीत करके समस्या का समाधान करने की सलाह दूँगा।
उत्तर:
मैं विनम्रता से अध्यापक को सही बात बताऊँगा ताकि उसके साथ न्याय हो सके।
उत्तर:
मैं उसका उत्साह बढ़ाऊँगा और उसे समझाऊँगा कि हार-जीत जीवन का हिस्सा है तथा अगली बार और अच्छा प्रयास करना चाहिए।
उत्तर:
मैं उसे बोलने के लिए प्रोत्साहित करूँगा और उसकी बात ध्यान से सुनूँगा।
उत्तर:
मैं अपनी पूरी क्षमता के अनुसार उसकी सहायता करूँगा और उसे विषय अच्छी तरह समझाने का प्रयास करूँगा।
करुणा, न्याय, सहयोग और सही निर्णय लेना ही एक अच्छे व्यक्ति की पहचान है।