प्रश्न उत्तर

प्रश्न उत्तर

कक्षा 6 हिंदी (मल्हार) – अध्याय: “पहली बूँद” : प्रश्नोत्तर

(क) सही उत्तर चुनिए और उसके सामने (★) लगाइए

 

1. कविता में ‘नव-जीवन की ले अँगड़ाई’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?

 

❌ बादल
❌ बूँद
★ अंकुर
❌ पावस

2. ‘नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर’ में ‘काली पुतली’ है—

❌ बारिश की बूँदें
❌ वृद्ध धरती
❌ नगाड़ा
★ बादल


(ख) चर्चा प्रश्न का उत्तर

 

हमने ये उत्तर इसलिए चुने क्योंकि कविता में वर्षा के आने से धरती पर नए अंकुर फूटते हैं, जो नवजीवन का प्रतीक हैं। वहीं, कवि ने नीले आकाश की तुलना आँखों से और काले बादलों की तुलना आँखों की पुतली से की है, जिससे प्रकृति का सुंदर चित्रण किया गया है।

मिलकर करें मिलान

क्रमांक कविता की पंक्तियाँ सही भावार्थ
1 आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर 2. बादल
2 बजा नगाड़े जगा रहे हैं, बादल धरती की तरुणाई 1. मेघ-गर्जना
3 नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर 4. आकाश
4 वसुंधरा की रोमावलि-सी, हरी दूब पुलकी-मुसकाई 3. हरी दूब

अंतिम मिलान

✅ 1 → 2 (बादल)
✅ 2 → 1 (मेघ-गर्जना)
✅ 3 → 4 (आकाश)
✅ 4 → 3 (हरी दूब)

पंक्तियों पर चर्चा

1. “आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर, बजा नगाड़े जगा रहे हैं, बादल धरती की तरुणाई।”

 

अर्थ:
कवि ने बादलों को समुद्र के समान बताया है, जो बिजली के सुनहरे पंख लगाकर आकाश में उड़ रहे हैं। बादलों की गर्जना नगाड़ों की तरह सुनाई देती है, जो वर्षा के आगमन की सूचना देकर धरती में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार कर रही है। यह पंक्ति वर्षा ऋतु के सुंदर और जीवंत दृश्य का वर्णन करती है।


2. “नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर। करुणा-विगलित अश्रु बहाकर, धरती की रुचिर-प्यास बुझाई।”

 

अर्थ:
कवि ने नीले आकाश की तुलना आँखों से और काले बादलों की तुलना आँखों की पुतली से की है। बादल दया और प्रेम से भरकर वर्षा के रूप में अपने आँसू बहाते हैं, जिससे प्यास से व्याकुल धरती की प्यास बुझ जाती है। यह प्रकृति के स्नेह और करुणा का सुंदर चित्रण है।

सुंदर चित्रण है।


सोच-विचार के लिए

(क) बारिश की पहली बूँद से धरती का हर्ष कैसे प्रकट होता है?

बारिश की पहली बूँद पड़ते ही सूखी धरती हरी-भरी हो जाती है। पेड़-पौधे, घास, पशु-पक्षी और मनुष्य
सभी प्रसन्न हो उठते हैं। वातावरण में शीतलता और ताजगी फैल जाती है। हरी दूब मुस्कराती हुई प्रतीत
होती है और प्रकृति में नया जीवन जाग उठता है।

(ख) कविता में आकाश और बादलों को किनके समान बताया गया है?

कविता में आकाश को नीले नयनों (आँखों) के समान तथा बादलों को काली पुतलियों के समान बताया गया है।


कविता की रचना – कल्पनात्मक दृश्य

कविता में कवि ने कई सुंदर और कल्पनाशील दृश्य प्रस्तुत किए हैं, जैसे—

  1. “आसमान में उड़ता सागर” – बादलों को उड़ते हुए समुद्र के रूप में दिखाया गया है।
  2. “बिजलियों के स्वर्णिम पर” – बिजली को सुनहरे पंखों के रूप में चित्रित किया गया है।
  3. “बजा नगाड़े” – बादलों की गर्जना को नगाड़ों की आवाज़ से तुलना की गई है।
  4. “नीले नयनों-सा अंबर” – आकाश की तुलना नीली आँखों से की गई है।
  5. “काली पुतली-से जलधर” – बादलों की तुलना आँखों की काली पुतली से की गई है।
  6. “हरी दूब पुलकी-मुसकाई” – हरी दूब को प्रसन्न होकर मुस्कराते हुए दिखाया गया है।

इन कल्पनात्मक प्रयोगों से कविता अधिक सुंदर, प्रभावशाली और आनंददायक बन गई है।

शब्द एक अर्थ अनेक

‘फूट’ शब्द के विभिन्न अर्थों में प्रयोग:

  1. अंग्रेज़ों की नीति थी फूट डालो और राज करो।
    ➜ यहाँ फूट का अर्थ आपसी मतभेद या विभाजन है।
  2. तेज़ गर्मी के कारण घड़ा फूट गया।
    ➜ यहाँ फूट का अर्थ टूट जाना है।
  3. बारिश होने पर खेत में अंकुर फूट पड़े।
    ➜ यहाँ फूट का अर्थ उगना या निकलना है।
  4. खुशी के आँसू उसकी आँखों से फूट पड़े।
    ➜ यहाँ फूट का अर्थ अचानक निकल पड़ना है।
  5. बच्चे हँसी से फूट पड़े।
    ➜ यहाँ फूट का अर्थ अचानक हँसना शुरू करना है।

अनेक शब्दों के लिए एक शब्द (धर से बने शब्द)

शब्द अर्थ
जलधर जल को धारण करने वाला (बादल/समुद्र)
धरतीधर पृथ्वी को धारण करने वाला (पर्वत)
गिरीधर पर्वत धारण करने वाला (भगवान कृष्ण)
चक्रधर चक्र धारण करने वाला (भगवान विष्णु)
शंखधर शंख धारण करने वाला
धनुधर धनुष धारण करने वाला
गदाधर गदा धारण करने वाला
त्रिशूलधर

त्रिशूल धारण करने वाला

शब्द पहेली (उत्तर)

संकेत उत्तर
आँख का दूसरा नाम नयन
बादल का दूसरा नाम जलधर
धरती का दूसरा नाम वसुंधरा
आकाश का दूसरा नाम अंबर
घास का एक प्रकार दूब
बिजली की आवाज़ जैसा वाद्य नगाड़ा

परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण नोट्स

✓ जलधर = बादल / समुद्र
✓ अंबर = आकाश
✓ नयन = आँख
✓ वसुंधरा = पृथ्वी
✓ दूब = हरी घास
✓ अंकुर = पौधे का प्रारंभिक भाग

याद रखने की ट्रिक:
“अंबर में जलधर, धरती पर दूब, नयन देखें प्रकृति का रूप।”