कक्षा 6 हिंदी (मल्हार) – अध्याय “गोल” : प्रश्नोत्तर
(1) “दोस्त, खेल में इतना गुस्सा अच्छा नहीं…” इस बात से मेजर ध्यानचंद के बारे में क्या पता चलता है?
❌ वे अत्यंत क्रोधी थे।
❌ वे अच्छे ढंग से बदला लेते थे।
❌ उन्हें हॉकी से मारने पर वे अधिक गोल करते थे।
★ वे जानते थे कि खेल को सही भावना से खेलना चाहिए।
(2) लोगों ने मेजर ध्यानचंद को ‘हॉकी का जादूगर’ कहना क्यों शुरू कर दिया?
★ उनके हॉकी खेलने के विशेष कौशल के कारण
❌ उनकी हॉकी स्टिक की अनोखी विशेषताओं के कारण
❌ हॉकी के लिए उनके विशेष लगाव के कारण
❌ उनकी खेल भावना के कारण
हमने ये उत्तर इसलिए चुने क्योंकि मेजर ध्यानचंद खेल को अनुशासन, सम्मान और खेल भावना के साथ खेलने में विश्वास रखते थे। उनकी असाधारण प्रतिभा, तेज़ी, नियंत्रण और गोल करने की क्षमता के कारण उन्हें “हॉकी का जादूगर” कहा गया।
| क्रमांक | शब्द | सही अर्थ/संदर्भ |
|---|---|---|
| 1 | लांस नायक | 2. भारतीय सेना का एक पद (रैंक) है। |
| 2 | बर्लिन ओलंपिक | 4. वर्ष 1936 में जर्मनी के बर्लिन शहर में आयोजित ओलंपिक खेल प्रतियोगिता। |
| 3 | पंजाब रेजिमेंट | 5. स्वतंत्रता से पहले अंग्रेजों की भारतीय सेना का एक दल। |
| 4 | सैंपर्स एंड माइनर्स टीम | 6. अंग्रेजों के समय का एक हॉकी दल। |
| 5 | सूबेदार | 1. स्वतंत्रता से पहले सूबेदार भारतीय सैन्य अधिकारियों का दूसरा सबसे बड़ा पद था। |
| 6 | छावनी | 3. सैनिकों के रहने का क्षेत्र। |
1 → 2
2 → 4
3 → 5
4 → 6
5 → 1
6 → 3
मेजर ध्यानचंद की सफलता का रहस्य उनका निरंतर अभ्यास, कड़ी मेहनत, अनुशासन, खेल के प्रति समर्पण और उत्कृष्ट खेल भावना थी। वे हमेशा अपने खेल को बेहतर बनाने का प्रयास करते थे और टीम भावना को सबसे अधिक महत्व देते थे। उनकी लगन और अथक परिश्रम ने उन्हें विश्व का महान हॉकी खिलाड़ी बनाया।
ध्यानचंद हमेशा देश और टीम के हित को अपने व्यक्तिगत हित से ऊपर रखते थे। वे अपनी सफलता का श्रेय पूरी टीम को देते थे। उन्होंने कहा था कि हार या जीत केवल उनकी नहीं, बल्कि पूरे देश की होती है। उनकी विनम्रता, सहयोग की भावना और देशप्रेम से स्पष्ट होता है कि वे स्वयं से पहले दूसरों को महत्व देते थे।
1. “या” का प्रयोग:
2. “व” का प्रयोग:
3. “बल्कि” का प्रयोग: