
‘उठो लाल, अब आँखें खोलो। पानी लाई ह�ँ, मँह धो लो।’ बचपन में यह प्यारी किवता
ु
आपने भी पढ़ी होगी। इस किवता को रचने वाले अयोध्यािसं
ह उपाध्याय ‘ह�रऔध’ ही
‘फूल और काँटा’ के किव हैं। बच्चों के िलए उन्होंने अनेक रोचक किवताएँ िलखी हैं।
उनका जन्म आजमगढ़ (उ�र प्रदेश) में ह�आ था। ह�रऔध जी क� चिचर्त काव्य-कृित िप्रयप्रवास को खड़ी
बोली का पहला महाकाव्य माना जाता है। बच्चों के िलए उनके अनेक किवता-सं
कलन प्रकािशत हैं िजनमें
चद्र-िखलौना ं और खेल-तमाशा उल्लेखनीय हैं।