अध्याय परिचय एवं शिक्षण उद्देश्य (Introduction)
 
हमारी पृथ्वी एक स्थिर शिला नहीं, बल्कि एक गतिशील और जीवंत ग्रह है। स्थलरूपों का निर्माण ‘जादूगर के दो हाथों’ की भांति कार्य करने वाली दो परस्पर विरोधी प्रक्रियाओं का परिणाम है:
  1. आंतरिक प्रक्रिया (Endogenic Forces): यह वह हाथ है जो पृथ्वी के गर्भ में टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल और मैग्मा की शक्ति से सतह को ऊपर उठाता है या पर्वतमालाओं का निर्माण करता है।
  2. बाह्य प्रक्रिया (Exogenic Forces): यह वह हाथ है जो हवा, पानी, हिमनद और समुद्री लहरों के माध्यम से ऊंचे स्थानों को घिसता (अपरदन) है और निचली जगहों को मलबे से भरता (निक्षेपण) है।
शिक्षण उद्देश्य (Learning Objectives):
  • पर्वत, पठार और मैदानों की भू-वैज्ञानिक संरचना में अंतर करना।
  • वलित, भ्रंशोत्थ और ज्वालामुखी पर्वतों की निर्माण प्रक्रिया का विश्लेषण करना।
  • स्थलरूपों का मानव जीवन, कृषि और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों का मूल्यांकन करना।
  • प्राकृतिक चुनौतियों (भूस्खलन, आकस्मिक बाढ़) और पर्यटन की संभावनाओं को समझना।
संकल्पना मानचित्र (Concept Map)
  • स्थलरूप (Landforms)
    • पर्वत (Mountains): संकरा शिखर, प्राकृतिक ऊंचाई।
      • वलित (Fold): हिमालय (एशिया), आल्प्स (यूरोप)।
      • भ्रंशोत्थ (Block): सतपुड़ा (भारत), ब्लैक फॉरेस्ट (यूरोप)।
      • ज्वालामुखी (Volcanic): किलिमंजारो (अफ्रीका), माउंट फूजी (जापान)।
    • पठार (Plateaus): सपाट ऊपरी सतह (मेज की तरह)।
      • तिब्बत का पठार: विश्व की छत (लंबाई: 2500 किमी)।
      • दक्कन का पठार: प्राचीन लावा निर्मित, काली मिट्टी का भंडार।
    • मैदान (Plains): जलोढ़ मिट्टी से निर्मित समतल भूमि।
      • गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदान: कृषि और परिवहन का केंद्र।

 

विस्तृत अध्याय नोट्स: NCERT का सार
5.1 पर्वत (Mountains): पृथ्वी के जीवनदाता
पर्वत वे स्थल हैं जो आस-पास के क्षेत्रों से 600 मीटर से अधिक ऊंचे और संकुचित शिखर वाले होते हैं।
  • प्रकार:
    • वलित पर्वत: प्लेटों के टकराने से निर्मित मोड़दार पर्वत। हिमालय इसका नवीनतम उदाहरण है।
    • भ्रंशोत्थ पर्वत: जब विशाल भू-भाग ऊर्ध्वाधर रूप से टूटता है। ऊपर उठे हिस्से को ‘हॉर्स्ट’ (Horst) और धंसे हिस्से को ‘ग्राबेन’ (Graben) कहते हैं।
    • ज्वालामुखी पर्वत: पृथ्वी के भीतर से निकले लावे और राख के जमने से बने शंकुाकार पर्वत।
  • महत्व: ये मीठे पानी के ‘वॉटर टावर्स’ हैं जहाँ हिमनद (Glaciers) पाए जाते हैं। यहाँ से निकलने वाली नदियों का विस्तृत जाल कृषि और पनबिजली का आधार है।
5.2 पठार (Plateaus): खनिजों के भंडार गृह
पठार आस-पास की भूमि से ऊपर उठा हुआ, सपाट शीर्ष वाला भाग है।
  • डेटा पॉइंट: तिब्बत का पठार विश्व का सबसे ऊंचा पठार है (4000-6000 मीटर) और इसकी लंबाई पूर्व से पश्चिम तक लगभग 2500 किमी है।
  • जलप्रपात: पठारों के ढाल तीव्र होने के कारण यहाँ भव्य जलप्रपात मिलते हैं, जैसे:
    • नोहकलिकाई (मेघालय): 340 मीटर ऊंचा।
    • हुंडरू जलप्रपात: स्वर्णरेखा नदी (छोटा नागपुर)।
    • विक्टोरिया फॉल्स: जम्बेजी नदी (अफ्रीका)।
  • मिट्टी: लावा पठारों में उपजाऊ काली मिट्टी पाई जाती है, जो कपास की खेती के लिए सर्वोत्तम है।
5.3 मैदान (Plains): सभ्यताओं के पालने
नदियों द्वारा लाई गई जलोढ़ मिट्टी के निक्षेपण से मैदान बनते हैं।
  • विशेषता: ये समुद्र तल से औसतन 200-300 मीटर की ऊंचाई पर होते हैं। यहाँ परिवहन का विस्तृत जाल बिछाना आसान है।
  • जनसंख्या: समतल भूमि, जल की उपलब्धता और उपजाऊ मिट्टी के कारण ये विश्व के सबसे सघन आबादी वाले क्षेत्र हैं।
5.4 रेगिस्तान और द्वीप समूह
  • रेगिस्तान: बहुत कम वर्षा वाले क्षेत्र। थार (गर्म) और लद्दाख (ठंडा) प्रमुख उदाहरण हैं।
  • द्वीप: पानी से घिरे भू-भाग। लक्षद्वीप (मूँगा/प्रवाल निर्मित) और अंडमान-निकोबार (ज्वालामुखी मूल) भारत के प्रमुख द्वीप समूह हैं।

Exercise Files
अध्याय 3 – स्थलरूप एवं जीवन (कक्षा 6, सामाजिक विज्ञान) (pdf)
1.22 MB