पाठ परिचय

पाठ परिचय

मनष्‍यों के भार से म ु क्‍त; अनेक प्रकार की ऊँ चाइ ु यों, ढलानों तथा विशाल
समतल भमिू से यक्‍त; अनेक प्रकार की श ु क्‍त‍ियों से सं
पन्‍न पेड़-पौधों को
आधार प्रदान करती हुई, हम सभी के लिए विस्‍तार को प्राप्‍त हो तथा अपनी
सं
पन्‍नता को प्रदर्तशि करे। पथृ्‍वी मेरी माता है तथा मैं उसकी सं
तान।
— अथर्ववेद, ‘भमिू सक्‍त’ (प ू थृ्वी के लिए स्तोत्र)

परिचय
अन्‍य स्‍तनधारी जीवों के समान, मानव भी पथृ्‍वी पर निवास करता है। जैसा कि आपने
देखा है, भमिू के अनेक रूप और विशेषताएँ हैं। एक क्षेत्र से दसरे क् ू षेत्र में इसका स्‍वरूप
बहु
त परिवर्तित हो जाता है। मान लीजिए कि आप झारखड के छोटा नागप ं र क्ु षेत्र से सड़क
द्वारा यात्रा कर रहे हैं और उत्तर प्रदेश के प्रयागराज पहुँचते हैं और फिर उ राखड म ं ें
अल्‍मोड़ा तक जाते हैं। इस रास्‍ते में आप अलग-अलग दृश्‍यभमिू (लैंडस्‍केप) को देखेंगे।
वास्‍तव में, आपको तीन प्रकार के स्‍थलरूप (लैंडफॉर्म्स) दिखाई देंगे, जिनके बारे में हम
आगे चलकर अन्‍वेषण करेंग

आइए पता लगाएँ
Æ कक्षा की गतिविधि के रूप में चार अथवा पाँच विद्यार्थियों के समह बनाइए और ू विद्यालय
के आस-पास के क्षेत्रों का अवलोकन कीजिए। आपको किस प्रकार की दृश्‍यभमिू दिखाई
देती है? क्‍या कुछ किलोमीटर की दरी पर दृश्‍यभ ू म‍िू में कोई परिवर्तन दिखाई दतेा है? क्‍या
लगभग 50 किलोमीटर के भीतर परिदृश्‍य में बदलाव होगा? अन्‍य समहों द् ू वारा दी गई
जानकारी के साथ इनकी तलना की
ु जिए।
Æ इन्‍हीं समहों के सा
ू थ भारत के किसी भी ऐसे क्षेत्र की यात्रा के बारे में चर्चा कीजिए, जहाँ वे
जा चके हैं। उन क् ु षेत्रों में दिखाई देने वाली विभिन्‍न प्रकार की दृश्‍यभम‍िय ू ों की सची बनाइए। ू
अन्‍य समहों द् ू वारा दी गई जानकारी के साथ इनकी तलना की
ु जिए।
स्‍थलरूप, पथृ्‍वी की सतह का एक भौतिक स्‍वरूप है। स्‍थलरूप लाखों वर्षों में आकार
लेते हैं और पर्यावरण तथा जीवन के साथ इनका महत्‍वपर्ण
ू सं
बं
ध है। इन्‍हें व्‍यापक रूप से
तीन श्रेणियों में बाँटा जा सकता है—पर्वत, पठार और मैदान (चित्र 3.1)।
इन स्‍थलरूपों में विभि‍न्‍न प्रकार की जलवायु और अलग-अलग प्रकार के
पेड़-पौधे तथा जीव-जं
तु पाए जाते हैं। मानव ने सभी स्‍थलरूपों के अनु
सार स्‍वयं
को
ढाला है, किंतुविभिन्‍न प्रकार के स्‍थलरूपों पर रहने वाले लोगों की सं
ख्‍या विश्‍व-भर
में भिन्‍न-भिन्‍न होती है।
पर्वत
पर्वत वे स्‍थलरूप हैं जो आस-पास की भमिू से कुछ अधिक ऊँ चे होते हैं। इन्‍हें चौड़े
आधार, खड़ी ढलान (चढ़ाई) और सँकरे शिखर (चोटियों) के रूप में पहचाना जा सकता
है। कुछ पर्वत अपनी अधिक ऊँ चाई के कारण हिम से ढँके होते हैं। ग्रीष्‍म ॠत में
ु कम
तंु
गता (एल्‍टीट्
यू
ड) पर हिम पिघल जाती है और जल में बदलने के बाद नदियों में